Tuesday 16 December 2008

ऱात की बात राज रहने दो

ऱात की बात राज रहने दो, आज दिल को उदास रहने दो।  

साँस ले ले के थक जाते हैं, हर घड़ी आप याद आते हैं। 
याद आना कोई गुनाह नहीं, भूल जाना मगर मज़ाक नहीं। 
ये सितम बार बार सहने दो, रात की बात राज रहने दो।  

चाँद मेरा कोई चुराता है, दिन तो बस यूँ ही डूब जाता है। 
मेरे रोने पे आज हंसते हैं, कल आसूं को वो तरसते हैं। 
अश्क गिरते हैं, आज गिरने दो, रात की बात राज रहने दो।  

फिर से वादे हज़ार करते हैं, तेरा गम हम खुशी से सहते हैं। 
रोज दिन की तलाश होती है, रात ही आसपास होती है। 
रात को दिन में अब उतरने दो, रात की बात राज रहने दो।

8 comments:

विनय said...

beautiful words!

SANJEEV MISHRA said...

bahut sundar bandhu.
"aaj dil ko udaas rahne do." atyant sundar. badhai sweekar karen.

"अर्श" said...

बहोत ही खुबसूरत लिखा है आपने बेहद उम्दा ... ढेरो बधाई स्वीकारें....


अर्श

अशोक मधुप said...

बहुत अच्छा गीतं। बधाई

संगीता पुरी said...

बहुत अच्‍छी रचना.....बधाई।

Poonam Agrawal said...

Aapka blog pada ....sabhi rachnaye ek se badhker ek hai.....
Meri badhai

BrijmohanShrivastava said...

क्या बात है भाई साहेब ,भूल जाना कोई मज़ाक नहीं /तुम अगर भूल भी जाओ ,मुझको, तो ये हक है तुमको मेरी बात और है मैंने तो मोहब्बत की है /अश्क गिरते हैं आज गिरने दो बहुत सुंदर ,आज की रात जागले ग़ालिब ,जिंदगी पडी है सो लेना / वादे करना और गम सहना वह भी खुशी से क्या शब्द प्रयोग करुँ कुछ समझ में ही नही आरहा इम्प्रेस्सिव कहूं या इन्कोम्प्र्लेब्ल /मै तो यह कह देता हूँ के रात \के तीन बज रहे हैं यादो ,अब तो थोड़ा सोने दो

rewa said...

मेरे रोने पे आज हंसते हैं, कल आसूं को वो तरसते हैं।

Bahut khub likha hai aapne. Keep it up.