Friday 2 January 2009

नाम ढोता हुआ हर आदमी भिखारी है

बड़ा शहर है यहाँ लोग बड़े मिलते हैं
खुशी के साए में ग़म बेशुमार मिलते हैं

रौनक-ऐ-जिस्म यहाँ हर अदा पे भारी है
नाम ढोता हुआ हर आदमी भिखारी है
अपनी नजर से ये बार बार गिरते हैं
खुशी के साए में ग़म बेशुमार मिलते हैं

कल अपने आप को बाजार में बिकते देखा
झूठ के कपडों से अहसास लिपटते देखा
चाँद सिक्कों से ऐतबार भी पिघलते हैं
खुशी के साए में ग़म बेशुमार मिलते हैं

ये तंग गलियाँ कहाँ से रौशनी आए
था बहुत शौक जो रहने को दिल्ली आए
हर एक चेहरे में चेहरे हजार दिखते हैं
खुशी के साए में ग़म बेशुमार मिलते हैं

13 comments:

विनय said...

लाजवाब! शेष क्या है कहने को!


---
तख़लीक़-ए-नज़र
http://vinayprajapati.wordpress.com/

विवेक सिंह said...

लाजवाब! नव वर्ष की आप और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं !!!

Amit said...

bahut he mast raha...

many many wishes for new year.....

"अर्श" said...

बहोत खूब साहब क्या बात कही है आपने वाह....ढेरो बधाई,...


अर्श

अक्षय-मन said...

टाइटल बहुत ही अच्छा है और इस नज़्म का तो जवाब नही बहुत अच्छा लिखा है भाई....

अक्षय-मन

अजित वडनेरकर said...

खूबसूरत नज्म है भाई...
नया साल शुभ हो...

रश्मि प्रभा said...

aaj ke parivesh ke ehsaason ko bakhoobi likha hai, yahi hasra hai,
aur ........ bahut badhiyaa

BrijmohanShrivastava said...

खुशी के साये में गम बेशुमार मिलते हैं कितनी सही हकीकत है /गल्तीहमारी यही है कि गम से बच कर खु;;सही चाहते है /गम न आए इस हेतु चारों ओर एक दीबार बना लेते है और परिणामस्वरूप बेचारी खुशी भी बाहर रुक कर रह जाती है /यह भी बिल्कुल सही है कि एक चेहरे में कितने चेहरे छिपे होते है ,उनका इल्म हमें तब होता है जब हमें कटु अनुभव होते हैं /

rewa said...

ये तंग गलियाँ कहाँ से रौशनी आए
था बहुत शौक जो रहने को दिल्ली आए
हर एक चेहरे में चेहरे हजार दिखते हैं
खुशी के साए में ग़म बेशुमार मिलते हैं

Bahut khubsurat! Bilkul sahi or saaf shabdon mein logon ki asaliyat jahir kiya hai aapne.

rgds.

varsha said...

aapka blog padhke lagta hai ki aap peshe se shayar honge aur fursat mein CA!! bahut badhiya likhte hain..

SANJEEV MISHRA said...

रौनक-ऐ-जिस्म यहाँ हर अदा पे भारी है
नाम ढोता हुआ हर आदमी भिखारी है
bahut khoob.

दिगम्बर नासवा said...

ये तंग गलियाँ कहाँ से रौशनी आए
था बहुत शौक जो रहने को दिल्ली आए

Dil waali dehli ki asli sachayee, well said

vandana said...

delhi ko yun hi dilwalon ki nhi kaha jata.bahut achche.