Thursday 8 January 2009

हाय उस नाजुक सी परी के वो अल्फाज

दर्द बेपरवाह कभी होने नहीं देते, 
पहलू में जिंदगी को सोने नहीं देते|  

एक और साल खिंच गई उम्र की कश्ती, 
काँधे पे मौत को मगर रोने नहीं देते|  

हाय उस नाजुक सी परी के वो अल्फाज, 
हमें ही करीब हमसे होने नहीं देते|

जीते हैं इसलिए कि मौत आएगी एक दिन, 
फुर्सत के ये लम्हे मगर जीने नहीं देते|  

डूबे तो कई बार उस चश्म में मगर, 
"शेखर" तेरे वजूद को खोने नहीं देते|

16 comments:

विनय said...

बहुत ख़ूब साहब!

---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम

varsha said...

aarzu to apni bhi hai ki zindagi ka jashn manaayen..magar ye Corporates ke ghaple hame sone nahi dete..

Harkirat Haqeer said...

एक और साल खिंच गई उम्र की कश्ती,
काँधे पे मौत को मगर रोने नहीं देते|

bhot badhiya....!
bhot khoooob.....!!

रश्मि प्रभा said...

is gazal ko gungunane ka dil karta hai,bahut khoob

Manish Kumar said...

एक और साल खिंच गई उम्र की कश्ती,
काँधे पे मौत को मगर रोने नहीं देते

ये शेर खास तौर पर पसंद आया

SANJEEV MISHRA said...

एक और साल खिंच गई उम्र की कश्ती,
काँधे पे मौत को मगर रोने नहीं देते|

एक बेहतरीन ग़ज़ल देने के लिए धन्यवाद .

आने को उनकी याद तो आती है अब हर पल ,
हम आंसुओं को आँखें भिगोने नहीं देते .

hem pandey said...

'डूबे तो कई बार उस चश्म में मगर,
"शेखर" तेरे वजूद को खोने नहीं देते|'

- एक बढिया रचना! साधुवाद.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

शब्द नही मिल रहे मिलते ही तारीफ करूँगा तब तक वाह वाह वाह

BrijmohanShrivastava said...

जिन्दगी को पहलू में सोने नही देते तो क्यों न जिंदगी के पहलू में ही सोया जाए /कंधे पे मौत को वो क्या रोने देगा जो ख़ुद अपनी लाश कंधे पर उठाए चल रहा हो /हम ख़ुद अपने से व अपनों से दूर होते जा रहे है किसी के अल्फाज़ क्या करेंगे / मौत का एक दिन सुनिश्चित है ,नींद क्यों रात भर नही आती / किसी के चश्म ने डूबने से उसका बजूद क्या खोये जो समंदर पार कर के आया हो

rewa said...

जीते हैं इसलिए कि मौत आएगी एक दिन,
फुर्सत के ये लम्हे मगर जीने नहीं देते|


A beautiful poem with beautiful words. Thanks for sharing your poem.

rgds.

दिगम्बर नासवा said...

उम्दा लिखा है,
जीते हैं इसलिए कि मौत आएगी एक दिन,
फुर्सत के ये लम्हे मगर जीने नहीं देते|

Pyaasa Sajal said...

mazaa aa gayaa...kavitao aur shayari se zara door tha kuch dino se...aaj yahaan padhke mazaa aa gayaa

Reetesh Gupta said...

जीते हैं इसलिए कि मौत आएगी एक दिन,
फुर्सत के ये लम्हे मगर जीने नहीं देते|

बहुत खूब...बधाई

अक्षय-मन said...

डूब ही गया.....

सारे के सारे शेर बहुत उम्दा हैं.....
आप बहुत ही अच्छा लिखते हैं भाई...


अक्षय-मन

Vijay Kumar said...

bahoot khoob .aakhiri do sher khas hain.

jacker said...

I think I come to the right place, because for a long time do not see such a good thing the!
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