Sunday 1 February 2009

अब दिल कहीं और लगाया न जाएगा

अब दिल कहीं और लगाया न जाएगा,  
लगायें भी तो वो ताव लाया न जाएगा|  

माजी के दिए दर्द बताऊँ कभी नहीं,  
पूछोगे गर तो मुझसे छुपाया न जाएगा|  

मुस्कुराकर तुम्हें आज बिदा करूँ मगर,  
खता माफ़ मुझसे हाथ हिलाया न जाएगा|  

चेहरा न देखने की कसम दिला तो दी,  
ख्यालों से उस शख्स का साया न जाएगा|  

बेबस ये दिल मेरा कुछ इस कदर समझा, 
अब और किसी से ये समझाया न जाएगा|  

मुझको भुला दिया उसने मगर खुदा,  
मुझसे तो महबूब भुलाया न जाएगा|  

वास्ता 'जमाल' का नींद से कब मगर,  
सो जाए फिर किसी से जगाया न जाएगा|

20 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर,हर शेर याद रखने लायक.
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

चेहरा न देखने की कसम दिला तो दी,
ख्यालों से उस शख्स का साया न जाएगा|

-वाह! बेहतरीन!

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

bahut khoob .
मुझको भुला दिया उसने मगर खुदा,
मुझसे तो महबूब भुलाया न जाएगा|

SWAPN said...

uttam rachna. badhaai.

Anil Pusadkar said...

बहुत बढिया, बधाई

दिगम्बर नासवा said...

चेहरा न देखने की कसम दिला तो दी,
ख्यालों से उस शख्स का साया न जाएगा|

वाह साहब..........खूबसूरत ग़ज़ल, खूबसूरत प्रस्तुति

vandana said...

bahut hi sundar sher hain ..........har sher apne aap mein ek kahani si bayan kar raha hai.

रश्मि प्रभा said...

waah.......bahut achha likha hai,sach bhi hai, aisa hi lagta hai

SANJEEV MISHRA said...

माजी के दिए दर्द बताऊँ कभी नहीं,
पूछोगे गर तो मुझसे छुपाया न जाएगा|

bahut hi badhiya ,aapki pichhlii do rachnayen padhkar nirasha si hui thi , lekin is ek sher se aapne wo sab qasr puri kar dii.

"अर्श" said...

shekhar bhai badhiya likha hai aapne deri ke liye muaafi chahata hun .. dhero badhai kubul karo bhai ...



arsh

आशुतोष दुबे "सादिक" said...

बहुत सुंदर

संगीता पुरी said...

बहुत अच्‍छा.....

rewa said...

बेबस ये दिल मेरा कुछ इस कदर समझा,
अब और किसी से ये समझाया न जाएगा|

Wah! Bahut khub.

अनिल कान्त : said...

भाई बहुत खूब .....उत्तम रचना

BrijmohanShrivastava said...

मुस्कराकर विदा करुँ लेकिन हाथ न मिलाया जाएगा /वास्तविक प्यार का सार निचोड़ कर रख दिया गया है /विदाई देना विवशता है हाथ मिलाना स्वेच्छिक है /यदि औपचारिकता वश हाथ मिलाया भी गया तो आँखें ही पीड़ा दर्शा देंगी

Atul Sharma said...

अगर सो गए तो फिर से उठाया जाएगा
अगर शेर है यह तो फिर से सुनाया ही जाएगा। मुस्कुराकर विदा करो या रोकर
आज तो तुम्‍हें नाराज किया ही जाएगा।

DIMPLE said...

us ki rukhsat ke waqat off ri juban bas etna hi kah saki...."achha"

Pyaasa Sajal said...

dekh raha hon kaafi samay se likhna band hai yahaan...kahan mashroof ho gaye shayr saab?

rewa said...

Bahut dino se kuch naya padhne ko nahi mil raha hai...please kuch daliye.

Paridhi Jha said...

apki rachna behad maarmik hai.... kahne ko koi muska ke padh le... kahne ko koi kisi ki yaad me padh le...

apki kalam me ye bhaavon ka sagar hamesha bhara rahe :)