Sunday 14 June 2009

करोगे याद तो हर बात याद आएगी

"४ साल से साथ में हैं दिल्ली में, साउथ इंडिया में मन नहीं लगेगा|कुछ भी करके यहीं रुक जाओ प्लीज़"

"क्या करें करियर भी तो जरुरी है न"

"ह्म्म्म्म, हम कभी रहे नहीं उधर, पता नहीं कैसे एडजस्ट करेंगे"

"आप रहिये यहीं, २ साल की तो बात है"

एक नजर उसकी और देखा| क्या रह सकती हो मेरे बिना| तुम्हारी छोडो, क्या मैं रह सकता हूँ| क्या करना है, कहाँ जाना है, सब पर तो पहले मुझसे हाँ कराती हो|

"जॉब ही है, कहीं करें, दिल्ली या साउथ इंडिया, क्या फर्क पड़ता है, २ साल की तो बात है!"
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कल दोपहर ही उसका मेसेज आया था| "हैदराबाद में जॉब मिली है, शनिवार शाम को जाना है|"

वैसे अलग हुए तो ३ महीने बीत गए, लेकिन आज की इस खबर से मन कुछ उदास सा है| एक टूटन सी है| भले ही दिन काट रहा बंगलौर में, एक सुकून जरूर था कि वो भी यहीं है| क्या पता सामने से आती दिखाई दे जाए| क्या पता अभी दरवाजे पर दस्तक हो| एक मेसेज ही आ जाए| कम से कम उसकी सहेली ही उसका हाल बता जाए|

आज मेसेज आया| "आज शाम की बस है, हो सके तो एक बार मिल लीजिये|"

किसी से मिलने में इतना डर पहले कभी लगा नहीं मुझे| मिला, शुभकामनाएं दीं, हाल चाल पूछा, बताया|

अलग होते समय उसकी आँखों में नमी ढूंढ़ रहा था मैं, लेकिन उसने मेरी और देखा ही नहीं| मेरे तो लफ़्ज भी भरभरा रहे थे, कमबख्त तड़प जुबान को भी नहीं छोड़ती| अभी २ मिनट में बस आ जायेगी| कुछ कह लूँ, फिर शायद कभी न मिलें|

"अपना ख्याल रखना"

"हाँ"

18 comments:

अक्षय-मन said...

meri to aankhain bhar aai aapka pyar aapke zajbaat dekhkar....
yahi pyar hai yahi wo ehsaas hai jo kabhi nahi mit sakta aur yahi wo bandhan hai jise koi bhi doori apne se alag nahi kar sakti....
aapka pyar amar rahe...

रंगनाथ सिंह said...

शाश्वत बहुत संवेदनशील पोस्ट लगाई है ?
किसी ने कहा है-
वो के हर एहदे मोहब्बत से मुकरता जाए !
दिल वो जालिम कि उसी शख्स पे मरता जाए !!

राहुल said...

कोपलें फिर फूट आईं शाख पर, कहना उसे
वो न समझा है, न समझेगा , मगर कहना उसे

varsha said...

दिल्ली , बंगलोर, हैदराबाद से परे एक ज़िन्दगी है जो सुकून के कुछ पल चाहती है, अपनत्व चाहती है। यह सब कोई शहर नही देता, यह तो इंसान को ख़ुद ढूँढना पड़ता है। हमारी दुआ है आपकी यह तलाश पूरी हो।

राज भाटिय़ा said...

अरे इतनी वेरुखी भी क्या.....भई इस लेख का जबाब कहां से ढूंढ के लाऊ, बहुत ही संवेदना शीळ लगी......

raj said...

waqate rukhsat wo etna hi bole 'achha' boht sunder.....very touching...

Pyaasa Sajal said...

bahut hi jazbaati kar diya aapne...kisi ka bhi likha aisa kuch padhke ek pal ko ghabraahat hoti hai,kahin uske niji anubahv se prerit to nahi....

aapne bhi kuch maheene doori banayi rakhi blogjagat se...aapko vaapas dekhke achha lag raha hai

vandana said...

bahut din baad aaye aur itni gazab ki post laga di ki kya kahne.....bahut hi hridaysparshi lekh hai ya aapke dil ka haal...........magar hai bahut hi touching.

दिगम्बर नासवा said...

संवेदनशील पोस्ट hai........baoot dinon ke baad aapne kuch likha vo bhi itnaa samvenaa se bharaa........

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

बहुत दिनों बाद आपके दर्शन हुए वह भी एक बिछड़ने वाली रचना के साथ

pooja said...

never came across as such, but still felt as if its happening in real.............

but the solution would be, Forget your past... and express your feel to her. Be friendly keep smiling and be happy for ever.......
so simple to say but nothing can be done other than this.....

Babli said...

दिल को छू लेने वाली और बेहतरीन रचना लिखने के लिए बहुत बहुत बधाई! लिखते रहिये! आपके नए पोस्ट का इंतज़ार रहेगा!

Reetika said...

baatein bhool jaati hain..yaadein yaad aati hai. yeh yaadein..kisi dil-o-janam ke chale jaane ke baad aati hai.....

aisa kyun hota hai ki dil yakeen nahi karna chahta jis par usi ko kabool kar zindagi mein aage badhna padta hai ?

Reetika said...

baatein bhool jaati hain..yaadein yaad aati hai. yeh yaadein..kisi dil-o-janam ke chale jaane ke baad aati hai.....

aisa kyun hota hai ki dil yakeen nahi karna chahta jis par usi ko kabool kar zindagi mein aage badhna padta hai ?

poemsnpuja said...

जहाँ से तुम मोड़ मुड़ गए हो वो मोड़ अब भी वहीं पड़े हैं..अलग हो कर भी कुछ है जो ठहरा रह जाता है, किसी से बिछड़ने का आखिरी लम्हा भूला नहीं जा सकता.

rewasmriti said...

गुज़रते वक़्त की हर मौज ठहर जाएगी....aisa lag raha hai bus abhi abhi kisi ko alvida kahkar aa rahi hun.

ashq said...

impressive .....!!!

pravin said...

Dil dhundhta hai phir wo hi phursat ke rat din.......... par ye jo mahanagri hai na mitra isme phursat kahan? bhagti hi rahti hai...