
रात का चाँद रुला जाता है मुझे,
उनसे दूरी को बताकर सताता है मुझे।जी करे नोच दूँ तेरी चमक पर अभी,
तुझे किस बात की रौउनत है की तू,
मुझसे एक बार भी न मिलने वाला,
हर पल जिंदगी से मिलाता है मुझे।
जख्म की राह से जो मैं कभी गुजरा,
जख्म की राह से जो मैं कभी गुजरा,
गुलों की याद फिर दिलाता है मुझे।
जो सिखाता रहा हंसने की अदा,
जो सिखाता रहा हंसने की अदा,
कुछ दिनों से अब रुलाता है मुझे।
उनको मुझपर यकीन नहीं है तो अब,
उनको मुझपर यकीन नहीं है तो अब,
खुदपर यकीन नहीं आता है मुझे।
अब यकीन उनको दिला दे ए खुदा,
अब यकीन उनको दिला दे ए खुदा,
जिनकी बातों पे यकीन आता है मुझे।
क्या कहा उनको नहीं अब भी यकीन ?
क्या कहा उनको नहीं अब भी यकीन ?
तू खुदा है यकीं नहीं आता है मुझे।
नहीं कहता तुझे खुदा भी मैं, मगर,
नहीं कहता तुझे खुदा भी मैं, मगर,
उनके गुस्से का असर डराता है मुझे।
1 comment:
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