.......फ़िर वही सय्याद का घर
इस कदर शामिल है मुझमें शहर की वीरानियाँ,
रगबत हुई है गाँव की रंगीनियों से अब|
उस आवाज की कशिश को दिल में किया है जबसे,
बुलंद हो चले हैं हर बुलंदियों से अब|
बहोत खूब लिखा है आपने भाई ... ढेरो बधाई आपको...
"its beautiful composition"regards
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2 comments:
बहोत खूब लिखा है आपने भाई ... ढेरो बधाई आपको...
"its beautiful composition"
regards
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