Sunday, 11 January 2009

बुधई और नीम का पेड़

रूह को छूने वाली यह ग़जल सुनें, जगजीत सिंह की आवाज में यह ग़जल "नीम का पेड़" धारावाहिक में आपने जरूर सुना होगा|

7 comments:

अजित वडनेरकर said...

मुझे ये काफी पसंद थी, जब इसका प्रसारण हो रहा था। वैसे अल्बम में भी आ चुकी है। जगजीत को उस ज़माने से पसंद कर रहा हूं जब इनके ईपीज़ निकला करते थे पॉलिडोर कंपनी से।

अमिताभ मीत said...

मुद्दत बाद सुनी ये ग़ज़ल. सुनवाने का बहुत बहुत शुक्रिया.

ravishndtv said...

बहुत सुंदर शाश्वत। आपका ब्लॉग अच्छा जा रहा है।

रश्मि प्रभा... said...

बहुत अच्छी ग़ज़ल है......

Anonymous said...

Yun to ye gazal kal hi sun li thee but aaj dobara sunne ki iksha hui to yahan douri chali aai:-)

Smart Indian said...

बहुत सुंदर!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत अच्छी ग़ज़ल है सुन कर मज़ा आ गया