.......फ़िर वही सय्याद का घर
मुझे ये काफी पसंद थी, जब इसका प्रसारण हो रहा था। वैसे अल्बम में भी आ चुकी है। जगजीत को उस ज़माने से पसंद कर रहा हूं जब इनके ईपीज़ निकला करते थे पॉलिडोर कंपनी से।
मुद्दत बाद सुनी ये ग़ज़ल. सुनवाने का बहुत बहुत शुक्रिया.
बहुत सुंदर शाश्वत। आपका ब्लॉग अच्छा जा रहा है।
बहुत अच्छी ग़ज़ल है......
Yun to ye gazal kal hi sun li thee but aaj dobara sunne ki iksha hui to yahan douri chali aai:-)
बहुत सुंदर!
बहुत अच्छी ग़ज़ल है सुन कर मज़ा आ गया
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7 comments:
मुझे ये काफी पसंद थी, जब इसका प्रसारण हो रहा था। वैसे अल्बम में भी आ चुकी है। जगजीत को उस ज़माने से पसंद कर रहा हूं जब इनके ईपीज़ निकला करते थे पॉलिडोर कंपनी से।
मुद्दत बाद सुनी ये ग़ज़ल. सुनवाने का बहुत बहुत शुक्रिया.
बहुत सुंदर शाश्वत। आपका ब्लॉग अच्छा जा रहा है।
बहुत अच्छी ग़ज़ल है......
Yun to ye gazal kal hi sun li thee but aaj dobara sunne ki iksha hui to yahan douri chali aai:-)
बहुत सुंदर!
बहुत अच्छी ग़ज़ल है सुन कर मज़ा आ गया
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