Saturday, 17 January 2009

क्या जानकर उन्हें बेवफा हम कहते हैं

Sad-Sam-2656


जुर्म होगा अब अगर मिलने जाए हम,


ख़ुद आयें तो उसे बेदिली वो कहते हैं।



कल तलक सूरत तुम्हारी थी हमारी जिंदगी,


आज भी ये हाल है कि मौत से हम डरते हैं।



धडकनों के रुकने से उस मौत के आने तक,


बीच के मंजर को जिंदगी हम कहते हैं।



दर्द कि पेशी हुई अब जिंदगी के सेज पर,


जाने कितने लोग हैं जो छुप छुपा कर सहते हैं।



वक्त बचता है कभी भी तुझको याद करने के बाद,


आंखों में नरमी लिए तेरा इन्तेजार हम करते हैं।



गिनतियाँ कितनी गिनीं थकती नहीं उँगलियाँ,


कितने दीवाने मेरी गली में मारे मारे फिरते हैं।



शक्ल उनकी देखकर ये ग़म सताता है बहुत,


जाने क्या जानकर उन्हें बेवफा हम कहते हैं।

23 comments:

Udan Tashtari said...

शक्ल उनकी देखकर ये ग़म सताता है बहुत,
जाने क्या जानकर उन्हें बेवफा हम कहते हैं।

-बढ़िया/

dhiru singh { धीरेन्द्र वीर सिंह } said...

मुझे यकीन नही होता कि सी ,ऐ शायर भी हो सकता था लेकिन मैं गलत था . बहुत खूब
गिनतियाँ कितनी गिनीं थकती नहीं उँगलियाँ,


कितने दीवाने मेरी गली में मारे मारे फिरते हैं।

Anil Pusadkar said...

बहुत बढिया।

vandana gupta said...

bahu badhiya

Unknown said...

bahut badhiya...

रश्मि प्रभा... said...

bahut hi badhiyaa gazal hai,
dard ke sur hain......

दिगम्बर नासवा said...

शक्ल उनकी देखकर ये ग़म सताता है बहुत,
जाने क्या जानकर उन्हें बेवफा हम कहते हैं।

बेहतरीन शेर है सब के सब और ये तो कतल है

Vinay said...

शाबाश, क्या लिख दिया, सीधे दिल से


---मेरे पृष्ठ
गुलाबी कोंपलेंचाँद, बादल और शामतकनीक दृष्टा/Tech Prevue

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर शेर
धन्यवाद

Anonymous said...

Aapke stock market ne aapse bewafaai kya kar di aap to sabko rulaaye jaate hain!!...ek badhiya si ghazal wafa par bhi likh daaliye..

योगेन्द्र मौदगिल said...

भाव अच्छे पर शिल्प के लिये पंकज जी को उनके ब्लाग पर मिल लो भाई..
और हां क्यूट पिल्ले वाली कविता पसंद आई..
बधाई...

हरकीरत ' हीर' said...

yogenra ji ki bat se sahmat hun aapki kavita k bhav acche hain pr ye gazal nahi ban pai...prayatn jari rakhen....aap me pratibha hai...

ss said...

जी मैं सहमत हुँ आपकी बात से। इसे आप गजल के रूप मेँ ना लेँ, बस भाव्नायेँ कागज पर हैँ। समय नहीं मिलता वरना जरूर सीखता। धन्यवाद।

Anonymous said...

वक्त बचता है कभी भी तुझको याद करने के बाद,
आंखों में नरमी लिए तेरा इन्तेजार हम करते हैं।

Bahut khubsurat! Aapke andaaz Kabil-e-tarif hai!

!!अक्षय-मन!! said...

जाने क्या जानकर....
क्या बात है भाई...
अच्छी भावनाए हैं.....
तुम लिख गए अपने दिल की बात
हमारी सुनलो हम क्या कहते हैं
हम कहते हैं की भाई बहुत अच्छा लिखते हैं....
सच में सारी की सारी रचनाए एक से बढकर एक होती बहुत दिलसे पढता हूं

अक्षय-मन

akshaya gawarikar said...

I'm not sure if you're in love or is it something else,my friend.
Way to Go!!

"अर्श" said...

badhiya likha hai aapne ... bhavabhibyakti bahot hi behatar hai .. silpi ho silpakari to sikhani hi hogi.... anyatha na le salah tak maane... bahot umda lekha hai aap me ...
aapka

arsh

BrijmohanShrivastava said...

पहला शेर शानदार यानी दौनों तरफ़ से हम ही ग़लत
दूसरा शेर ""बड़ी ठण्डी सज़ा दी वक्त ने रहत पसंदी की
घबराते थे जो मरने से वो अब जीने से डरते हैं
बीच के मंजर को जिंदगी कहना बहुत प्यारी बात
जिन्दगी की सेज पर दर्द की पेशी ,अद्भुत कल्पना
आंखों में नरमी या आंखों में नमी भी हो सकता है
गली में मारे मारे फिरने वाले तो असली दीवाने होते ही नहीं है
कुछ तो मजबूरियां रहीं होंगी आदमी यूँ बेवफा नहीं होता

Arvind Gaurav said...

आपने कहा की आपकी रचनाओं को ग़ज़ल के रूप में ना ले, ठीक है इसे ग़ज़ल नही कहता लेकिन आपकी ये रचनाये सीधे दिल तक pahunchkar कुछ याद दिला गई

Manuj Mehta said...

कल तलक सूरत तुम्हारी थी हमारी जिंदगी,
आज भी ये हाल है कि मौत से हम डरते हैं।

acche sher ban pade hain. matle ke niyam bhi jaane.

Arvind Kumar said...

bahut badhiya gazal likha hai aapne ....dil ko chu gaya

Puja Upadhyay said...

शक्ल उनकी देखकर ये ग़म सताता है बहुत,
जाने क्या जानकर उन्हें बेवफा हम कहते हैं।
bahut khoob likha hai, par ishk ka to yahi haal hota hai, wo kahte hain na...
ham aah bhi bharte hain to ho jaate hain badnaam
wo katl bhi karte hain to charcha nahin hota :)

Anonymous said...

शक्ल उनकी देखकर ये ग़म सताता है बहुत,
जाने क्या जानकर उन्हें बेवफा हम कहते हैं।

Hmmm...last line is very beautiful!