Tuesday, 16 December 2008

कुछ जिंदगी भी हमपर

हैरान हैं गर जिंदगी इसी को कहते हैं, 
कुछ लोगों ने कहा है वो खुशी से मर गए|  

कुछ लोग मर जाते हैं इनकार को सुनकर, 
हम हैं की बस लबों की खामोशी से मर गए|  

पलकों पे घूमते थे कई ख्वाब बेपरवाह, 
कल शाम सुना है कुछ खुदकुशी से मर गए|  

कुछ जिंदगी भी हमपर नाराज थी 'जमाल', 
कुछ उनकी निगाहों की दिलकशी से मर गए|

4 comments:

कडुवासच said...

कुछ लोग मर जाते हैं इनकार को सुनकर,
हम हैं की बस लबों की खामोशी से मर गए|
... बहुत प्रभावशाली अभिव्यक्ति है।

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

BAHUT KHUB JANAB. NARAYAN NARAYAN

रश्मि प्रभा... said...

कुछ लोग मर जाते हैं इनकार को सुनकर,
हम हैं की बस लबों की खामोशी से मर गए| .......bahut achhi abhivyakti

vandana gupta said...

hum hain ki labon ki khamoshi se mar gaye.......kya khoob panktiyan likhi hain,hum to aapki in panktiyon pe mar gaye